Sunday, October 5, 2008

राजधर्म जाए पर सत्ता न जाए

स्वतंत्रता के बाद के भारतीय राजनीतिज्ञ "गलाकाट" राजनीती में विश्वास करते हैं अतः "सत्ता" और "शक्ति" को बरक़रार रखने के लिए कोई भी हद पार करने से ये कतराते नहीं हैं I

वैसे तो उपरोक्त पंक्तियों को सिद्ध करने के लिए सैकड़ो बड़े और शायद कई हज़ार छोटे उदहारण दिए जा सकते हैं पर हल-फिलहाल में उड़ीसा के कंधमाल जिले में ईसाईयों के खिलाफ जारी हिंसा और "नविन पटनायक" सरीखे मुख्यमंत्री की अक्रमन्यता या कहें मजबूरी में "ध्रितराष्ट्र" बनने के विवशता काफी सटीक उदहारण साबित हो सकता हैI

हमारे राजनेता एक बार "सत्तासीन" होने के बाद उससे आसानी से अलग होना नहीं चाहते और सत्तामोह में अपनी सारी नीतिगत ज्ञान को ताक पर रख देते हैंI

नवीन पटनायक देल्ही विश्वविद्यालय के अन्तर्गर्त और ईसाईयों के द्वारा संचालित "संत स्टीफन कॉलेज" से स्नातक हैं और वर्त्तमान में "संघ" प्रेरित "भारतीय जनता पार्टी" के सहयोग से उड़ीसा के सत्तासीन मुख्यमंत्री हैं पर इसबार ईसाईयों के खिलाफ होने वाली बर्बरता जब अपनी सारी सीमाएं लाँघ गईं है "नवीन" सरकार इस हिंसा को काबू करने में पुरी तरह विफल साबित हुई है I

उड़ीसा में वर्त्तमान हिंसा के पीछे शायद कई जमीनी हकीक़त होंगी पर एक बात साफ़ है की नवीन पटनायक अपनी "हिंदूवादी सहयोगी पार्टी" को नाखुश करने का हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है जिसका परिणाम है की केन्द्र से पर्याप्त मात्रा में "अर्धसैनिक बल" मिलने के बावजूद हिंसा दमन हेतु कोई इच्छाशक्ति नहीं दिखा पाए हैंI

हमारे देश में पार्टी केवल "सत्तासीन" होने की राजनीती करती हैI इनके मन में किंचित मात्र भी व्यापक विकाश और सर्वजनकल्याण का चाहत नहीं होताI हर पार्टी अपने विशेष वर्ग का समर्थन पाने के लिए " कुछ भी करने से नहीं हिचकता I विगत कुछ वर्षों में केन्द्र और राज्यों की सरकारें अपनी सहयोगी दलों के समर्थन वाली "वैशाखी" के सहारे ही टिक पाई है और नेतृत्वा वाली पार्टी और उसके नेता मजबूर होते हैं सहयोगी दलों के इशारे पर नाचने के लिएI

नहीं तो आज के आधुनिक युग में "संत स्टीफन कॉलेज" के स्नातक और " बीजू पटनायक" जैसे उड़ीसा के महान नेता के पुत्र के नेतृत्वा वाली सरकार को 38 दिन उन आरोपियों को गिरफ्तार करने में जाया नहीं करना पड़ता जिन पर एक 29 वर्षीय कैथोलिक नर्स को नंगा परेड करने पर विवस करने और बलात्कार करने का संगीन आरोप लगे हैंI

इस मामले में केन्द्र की संप्रग सरकार ने भी जानबूझ कर उदासीनता दिखायी है क्यों की ये भी आने वाली चुनावों में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती I

केन्द्र सरकार में एक तरफ़ हमारे गृहमंत्री है जो अनुकम्पा के आधार पर गृह मंत्रालय के सिंहासन पर विराजमान हैंI वर्त्तमान गृहमंत्री को न तो कोई जनमानस का वोट प्राप्त हैं और न ही वे कोई विशेष काबिलियत रखते हैं Iसच्चाई तो यह है की वे सिर्फ़ कांग्रेस पार्टी के स्वामिभक्त होने का फ़ल खा रहे हैंI

सो पुरानी कहावत है की प्रसूति की पीर वही औरत जानती है जिसने बच्चा जना हो बाँझ औरत इस पीर कों कभी नहीं समझ सकती, पाटिल बाँझ औरत की इस्थिति में हैं इसीलिए सम्बेदनविहिन गृहमंत्री हैं I

दूसरी तरफ़ हमारे प्रधानमंत्री हैं जो की बेदाग छवि वाले और ज्ञानी ब्यक्ति है पर कहीं न कहीं वह भी उतनी सशक्तता से प्रधानमंत्री के पद पर काबिज नहीं हैं क्योंकि वे सोनिया गाँधी के इच्छा से इस पद पर आसीन हैंI नहीं तो हिंसा के आग में झुलस रहे उड़ीसा के हजारों निर्दोष ईसाईयों कों यह इंतज़ार नहीं करना परता की फ्रांस के राष्ट्रपति भारत के प्रधानमंत्री कों यह याद दिलाएं की उनके आपने देश भारत में हजारों निर्दोष लोगों कों धर्मं के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है और वे (प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह) जल्द से जल्द करवाई करेंI

8 comments:

Udan Tashtari said...

अरे, हिन्दुस्तान है भई. यहाँ तो हनुमान को जब याद दिलाओ कि तुम उड़ सकते हो तब उड़ता है..तो फ्रांस के राष्ट्रपति का याद दिलाना तो जायज सी बात है.

शोभा said...

सही कह रहे हैं आप. इसीतरह सुंदर विचार देकर जाग्रति लेट रहिये.

Atul Mishra said...

aapki baato se main bhi 100% sahmat hoon....

हिन्दीवाणी said...

आपने बहुत नापाक गठजोड़ पर चोट की है। बधाई। यही तेवर बनाएं रखें।

Anonymous said...

Mujhe lagta hai apki ye bat logically sahi nai hai. karan aap khud samajh sakte hai. mai kae aese gaon ghuma hu jaha hinduon ko pralobhan dekar dhram parivartan karaya jata hai, or esame esai misionary sabse aage hai. yadi hamare desh me ye hinduvadi sangthan apni ugra roop dkiha rahe hai to usaki khas vajah central government ki tushtikaran ki politicas hai. udaharan ke liye hamare prime minister france me jakar es ghanana par mafi mangte hai par unhone aaj tak kabhi bhi pakistan or hindu or yahan bhi hindus par kiye gaye atyachar par mafi to door ki bat bolana bhi munasib nai samajha. aap buda mat manana ye bat maine esiliye nai kahi hai ki mai ek rss ka pracharak hu. par logically yahi sochata hu. dhnyabad

अशोक कुमार said...

भावेश जी, मेरा लेख आजादी के बाद की भारतीय राजनीती जिसमे लगभग सभी पार्टी, नेता और उनके "वोटबैंक" के लिए किसी भी हद तक गिरने को केंद्रित कर के किया गया है I रही बात गरीब हिन्दुओं को प्रलोभित कर के "ईशाई धर्मं" में परिवर्तित करने की तो हमारे संबिधान में "Anti Conversion Act" है फिर भी वही निचले स्तर के राजनीती करने के कारण इस कानून को कठोरता के साथ प्रयोग नहीं किया जाता और परिणाम सामने है I

दूसरी तरफ़ "हिंदू धर्म" के अग्रणी नेताओ को यह भी आत्मा मंथन करना चाहिए की क्यों उनके लोग थोरे से प्रलोभन के कारण दूसरे धर्म के अनुनाई बन रहें हैं I

प्रदीप मानोरिया said...

राह धर्मं जाए टी ओजाये पर सत्ता ना जाए
प्राण किसी के जाए तो जाए पर पैसा हमारे पास ही आए
ऐसी मानसिकता वाले लोगों के हाथ में देश यह हमारा दुर्भाग्य ही है
धन्यबाद आपका स्वागत है
आपको मेरे ब्लॉग पर सादर आमंत्रण है मेरी नई रचना " कांग्रेसी दोहे " पढने के लिए
प्रतीक्षा है

Anonymous said...

दूसरी तरफ़ "हिंदू धर्म" के अग्रणी नेताओ को यह भी आत्मा मंथन करना चाहिए की क्यों उनके लोग थोरे से प्रलोभन के कारण दूसरे धर्म के अनुनाई बन रहें हैं I


yah sach hai hindu dharm ke agrani neta es chij ko sahi dhang se pahchan nai paye hai jisase log dusre dharm ko apna rahe hai, par hamara kya kartabya banta hai ki ham es apradh ko yuhin chupchap sahan karte rahe?

chaliye en baton ko chhoriye. kaun sahi hai kaun galat ye bat apni apni tark se samajha ja sakta hai.

par rahi bat hindulism ki to ye baat mai yahan kahana chahta hu yadi rss, vhp jaise sangthan es desh me naa ho to hindu yaha bahot jaldi hi congress jaisi mushlim parst jaisi party ki khatarnak eradon ka samana karega. esaka saboot esane sachhar report or sena me mushlimon ki ginati se de diya hai.

sayad apko ye baat bhi tarkhin lage par aap bhi ek hindu hai kabhi na kabhi es tarkhin baton ka arth apko jaroor samajh aa jayega, dhnyabad